एक ग़ज़ल "ये ठीक नहीं है"



ये ठीक नहीं है,

हुस्न संगमरमर, नूर पाकिज़ा उसपर, 
हम देखे ना तुम्हें, शिकवा नज़रें झुका के करते हो। 
कहते हो आँखें चुरा लूँ तुमसे, ये ठीक नहीं है।।

सादगी की बुत, आंखों में हया उसपर, 
हम दिल ना हारें, क्यूँ ये सितम करते हो। 
कहते हो ज़िद ना करो, ये ठीक नहीं है।।

गाल गुलाबी, होठों की लाली उसपर, 
हम बहके ना इनपर, नक़ाब ओढ़ के निकलते हो। 
कहते हो दिल ना धड़के मेरा, ये ठीक नहीं है।।

कानों में बाली, नाक में पिन उसपर, 
हम होश ना खोएं, क्यूँ ये सब छुपा के रखते हो। 
कहते हो सुनो दुनियाँ की, ये ठीक नहीं है।।

खुद इतने ज़ुल्म हर बार मुझपर, 
फिर क्यूँ बदनाम मुझे सरे बज़्म करते हो। 
कहते हो मोहब्बत नहीं है तुमसे, ये ठीक नहीं है।। 


Comments